एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
सोचता हूँ जरूर मुझे तुमसे प्यार है
अपने आप ही छप जाता है जब
खटर-पटर करती उँगलियों से तुम्हारा नाम,
और मोबाइल पर नंबर लगते हुए जब ऑफिस से
डायल हो जाया करती है तुम्हारा ही नंबर,
तो सोचता हूँ जरूर मुझे तुमसे प्यार है.
कालेज के दिनों की बात होती तो शायद
दोस्तों को दिखाया करता तुम्हारा नाम,
उन्हें बताता हर वक़्त हो रही “प्रोग्रेस” को.
पर जब आता ख़याल, अरसा हुआ विवाह को
तो सोचता हूँ जरूर मुझे तुमसे प्यार है.
फिर याद आता है सुबह हुए झगड़े का.
विषय था, क्या चाय ऐसी बनती है
बहुत फीकी, बहुत मीठी या बहुत कड़वी?
पर जब अच्छा नहीं लगता बरिस्ता की कॉफी
तो सोचता हूँ जरूर मुझे तुमसे प्यार है.
कभी कभी अफ़सोस हुआ करता है
कि नहीं मिली तुम उन मस्ती के ज़माने में
नहीं तो होता बस तेरा ही नाम उन फसानों में.
फिर जब झेंप या डर नहीं लगता तुम्हे बताने में
तो सोचता हूँ जरूर मुझे तुमसे प्यार है.
और भी बहुत कुछ हैं जो तसल्ली देती है
कि रहेगा सफ़र के अंत तक तुम्हारा साथ,
हम तब भी चलेंगे डाल हाथों में हाथ.
जब रूह काँप जाती है तुम्हारे न होने के ख़याल से
तो सोचता हूँ जरूर मुझे तुमसे प्यार है.
| Print article | This entry was posted by दरभंगिया on May 26, 2009 at 7:06 pm, and is filed under कवितायेँ. Follow any responses to this post through RSS 2.0. You can leave a response or trackback from your own site. |


about 2 years ago
aapki kavita mujhe bahut bahut bahut achchhi lagi
about 2 years ago
कौतुक रमण जी……….
प्यार होता ही बहुत हसीं है…… और जब हमसफ़र साथ हो वो भी जीवन संगनी बनकर तो इसमे चार चाँद लग जाते हैं………. फिर तो उसके सामने भले ही उसकी बनाई फीकी चाय अच्छी न लगे लेकिन उसकी अनुपस्थिति में बरिस्ता की कॉफी कैसे अच्छी लग सकती है….. आप लोगो का प्यार ऐसे ही बरकरार रहे…..
बधाई……
about 2 years ago
बहुत बेह्तरीन रही आपकी रचना!!
about 2 years ago
bahut sundar aur prem se paripurna.
about 2 years ago
Waah ! Kya baat kahi….
about 2 years ago
आज बहुत अरसे के बाद दिल को छूने वाली कविता पड़ने को मिली
आज के इस भागमभाग मे भी घर की जो याद आपने दिला दी उसके लिए धन्यवाद्
about 2 years ago
har pati ko ye hi soch rakani chahiye.pati and patni jivan k do pahiye hain,ise balance me rakhna chahiye.waise meri sadi nahi hui hai.
about 2 years ago
pyar pya hota hai jisme dard, dimmedari, ehshah, jhagara, ruthana sab hota hai jo aapsi pyar ko badata hai.
by the by meri v shadi nahi hue hai avitak