एक पुरुष का चॉकलेट बन जाना
एक लड़की का उसके नितम्ब का टुकडा खाना
कहलाता है अश्लील

उसी बदबू छुपाने वाली तरल के प्रचार में
जब गोते लगाती है एक स्त्री मन ही मन अभिसार में
तो वह नहीं कहलाता अश्लील

फिर लगाता है वही तरल एक पुरुष समंदर किनारे
लड़कियाँ अन्तरंग वस्त्रों में चली आती हैं दौड़े दौड़े
तो नहीं कहलाता अश्लील

स्त्री को निहारना इतना सहज है
कि हम विज्ञापन बनाते हैं सिर्फ उन्ही को देखने के लिए
हम सर हिलाते हैं जब वह पूछती है “छुओगे?”