एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
ईश्वर की रचना
बेकार की लफ्फाजी ही करनी है ना!
तो कर देंगे.
और बन जायेगी
एक कविता.
बिन अर्थ,
बेकार.
ऐसा नहीं है.
हर लिखे हुए शब्द
का एक अर्थ होता है.
ठीक उसी तरह,
जैसे कि विश्व में हर जीव का.
विश्वास नहीं होता,
कि कुछ मनुष्य
सिर्फ मिटाने के लिए बनाये जाते होंगे,
स्लेट पर लिखे शब्दों की तरह.
या फिर ईश्वर ही नहीं है?
| Print article | This entry was posted by दरभंगिया on June 16, 2009 at 5:22 pm, and is filed under कवितायेँ. Follow any responses to this post through RSS 2.0. You can leave a response or trackback from your own site. |


about 2 years ago
सही कहा है आपने हर शब्दों का अर्थ।
आदम खुद भगवान है खोज रहा है व्यर्थ।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
http://www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
about 2 years ago
यह क्या ? अपनी ही अभिव्यक्ति पर इतनी त्वरित टिप्पणी ? क्यों?
about 2 years ago
मजाक वाली टिप्पणी तो अलग ही दो. वो इस रचना के लिए तो ठीक नहीं है. फिर कभी वैसा लिखो तो लगा लेना.
about 2 years ago
अपने मनोभावों को सुन्दर शब्द दिए है।
about 2 years ago
Main login kar ke chhod ayaa tha, Kisi ne office se majak kiya.