एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
कब इतनी शामत आयी है
लंका, पाक और नेपाल
तिब्बत, बर्मा और बंगाल.
हाय रे भारत का भाग्य
मिले पड़ोसी सब जंजाल.
भये आजादी को साल साठ
गये पढ़े पढ़ाये कितने पाठ.
फिर भी ना जब आयें बाज
कैसे करें यह इनका इलाज.
अनचाहे रहते उलझते इससे
चीन, अमेरिका, इंग्लिस्तान.
परेशान है देश हर ओर से
कैसे बचाए सबकी जान.
उनसे अलग संतान देश की
आन देश की, बान देश की.
देखो कैसे बेकार भटक रहे
और गिराते शान देश की.
कंगारूओं की गलती होगी
हम भी कहाँ बाज हैं आते.
उनके घर में ही बैठ कर
दिन रात उनको गरियाते.
भूत उनका है सब जानते
वे न कोई नियम मानते.
यदि पता है, नहीं सुरक्षित
क्यों न लौट तुम हो आते.
सड़कें वहां की बहुत है चौड़ी
हैं इम्रारत भी गगन को छूते.
पर देखो ना, क्या नहीं यहाँ पर
अपने शहर भी नहीं रहे अछूते.
हाँ माना थोड़ी कठिनाई है
पर कब इतनी शामत आयी है.
जो छोड़ के घर यह तुम्हारा
ऑस्ट्रेलिया तुमको भायी है.
| Print article | This entry was posted by दरभंगिया on June 21, 2009 at 3:09 pm, and is filed under कवितायेँ. Follow any responses to this post through RSS 2.0. You can leave a response or trackback from your own site. |

about 2 years ago
हाँ माना थोड़ी कठिनाई है
पर कब इतनी शामत आयी है.
जो छोड़ के घर यह तुम्हारा
ऑस्ट्रेलिया तुमको भायी है.
अच्छा है!
about 2 years ago
bahut badhiya rachana .
about 2 years ago
सही रचना…सब सच सच!
about 2 years ago
हाँ माना थोड़ी कठिनाई है
पर कब इतनी शामत आयी है.
जो छोड़ के घर यह तुम्हारा
ऑस्ट्रेलिया तुमको भायी है….
bharat ki videsh niti shayad “up to the mark” nahi hai…..
…yaad hai indra gandhi wala daur bhi…..
about 2 years ago
BAHUT ACHCHHA KABITA HAI , JO KI BHARTAT HR PRISTTHI ME ACHCHHA RAHATA HAI…..
about 2 years ago
Raaman Baba ko Samarpit —
“Ye blog aur Ye paricharcha,
Ghar me likhen to bahut achha!
Agar Office me likhen to
Company bachega ki nahi ye Bhagwan ki ichha.”
=> Manoj