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मिल के रहिये
Mar 30th
इतनी भाषाएँ, इतने प्रान्त
कुछ गरीब और कुछ संभ्रांत
देखो हैं ये कितने अशांत
मेरे दिन और उसके रात
मिले जब दोनों साथ
करते थे कुछ ऐसी बात
हो नहीं सकता भला इनका
जब तक न चलें
ये ले हाथों में हाथ
नहीं मिलेगी सुकून तुम्हे
कितने अजाँ ही कर लो तुम
और रगड़ लो टीके माथ

आपने कहा