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अच्छा तालीबान -बुरा तालीबान
Mar 5th
सुना है पाकिस्तान सरकार ने तालिबानियों का वर्गीकरण किया है, अच्छा तालीबान और बुरा तालीबान. टाईम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा है मस्ट बी जोकिंग. नहीं वह मजाक नहीं कर रहे, उनका अच्छे तालीबान का मतलब उन तालिबानियों से है जो सरकार के इशारे पर चलते हैं और बुरे तालिबानियों का अर्थ कि वह अब उन्हें काबू नहीं कर पा रहे हैं.
स्तिथि जितनी गंभीर दिखती है, वास्तव में उस से कई गुना ज्यादा गंभीर और भयावह है. आप इस बात का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि जब छानबीन ठीक से शुरू भी नहीं हुई थी कुछ पाकिस्तानी नेताओं और अधिकारीयों ने हथियारों के भारत में निर्मित होने की बात कह दी.
मैं इस बात से ज्यादा चिंतित नहीं हूँ कि वे भारत से बदले का मौका ढूंढ रहे थे या अंदरूनी कमजोरियों को ढकने की कोशिश. भयावह यह है कि किस तरह ये नेतागण और अधिकारीगण स्तिथि से मुँह मोड़ कर लोगों का ध्यान बटा कर इस बात से इनकार कर रहे हैं कि वास्तव में पाकिस्तान में कोई समस्या है भी.
और जब तक ये स्तिथि को इमानदारी से जायजा ले कर स्वीकार नहीं करते, सुधार की तो सोच भी नहीं सकते. मतलब इन्होने यह मान लिया है कि चाहे देश भांड में जाये इन्हें कुछ नहीं होगा.
कितना गलत सोच रहे हैं? एक बार अपने सारे कमरे बंद कर के एकांत में निष्पक्ष हो कर फिर से सोचें तो पता चल जायेगा कि क्या हो रहा है.
शायद आप लोगों ने भस्मासुर का किस्सा न सुना हो. अगर सुना होता तो पता होता कि असल तालीबान वही है जिसे आप बुरा तालीबान करार रहे हैं. वास्तव में ऐसी जितने भी गुट हैं जो कलयुगी राक्षस का काम कर रहे हैं वे शक्ति और समृध्धि पाने के लिए कलयुगी देवताओं की तपस्या करते हैं. जिनमे आज एक नहीं कई शिव हैं जो इन भस्मासुरों को अमरता का वरदान देने पर तुले हुए हैं. समस्या तब बढ़ जाती है जब ये भस्मासुर निवासी हों.
आप कलयुगी देवताओं को इस बात का तनिक भी अहसास नहीं है कि यदि ये भस्मासुर इसी तरह बढ़ते रहें और किसी दिन अपनी औकात पर आ जाएँ तो आपको किन कंदराओं में शरण लेनी पर सकती है.
कौन देता हैं इन्हें हथियार?
Mar 3rd
रोज खबर आती है आतंकवादी और अपराधिक हमलों की. पर मैंने कभी यह नहीं सुना की दुनिया भर की सरकार मिल कर हथियार बनाने वाली या इन लोगों तक हथियार पहुँचने वाले कंपनी और देश का कभी कुछ किया हो.
इतने हथियार उनके पास ऐसे ही तो नहीं आ जाते. वे इतनी मात्र में हैं की लुटे हुए भी नहीं मने जा सकते. फिर कोई तो नेटवर्क है जो इन्हें यह सब मुहैया करवाता है. फिर कोई यदि बता सकता तो मैं जरूर पूछता कि बंबई या लाहौर में होने वाले हमलों में जो हथियार प्रयोग में आये वे किस के किस कंपनी के द्वारा बनाये गए थे. और उस देश की सर्कार या विश्व समुदाय ने उनके साथ क्या किया.
मुझे लगता है कि यदि इनके सप्लाई का रास्ता रोक दिया जाये तो इन पर काबू पाना आसान हो जायेगा. फिर समझ नहीं आता कि विश्व समुदाय इन आयुध निर्माताओं पर या निर्यातकर्ताओं पर कोई कारर्वाई क्यों नहीं करता.
क्या पाकिस्तान तालीबनिस्तान बन जायेगा?
Mar 3rd
आज पाकिस्तान में जो कुछ भी हो रहा है वह यह साबित करता है कि आम आदमी क्या सोचता है इस बात से किसी को सरोकार नहीं है.
मैं यह कतई नहीं मान सकता की एक आम पाकिस्तानी अमन और सुकून नहीं चाहता होगा, फिर यह सरकारें ऐसी क्यों हैं? क्या उनको नहीं पता की अगर देश ही न होगा तो उनकी सरकारियत भी नहीं रहेगी? एक पल को मान लें की सर्कार बेबस है और आर्मी व आई एस आई ही दखल दे रहे हैं, तो इतना तो वह भी समझते होंगे की अगर देश न होगा तो वह भी नहीं रहेंगे. फिर आखिर वह कौन सी ताकत है जो पकिस्तान को पीछे की ओर धकेल रही है और उसे दुनिया में सबसे बदनाम देश बना चुकी है. फिर भी वहां की सर्कार उन ताकतों का कुछ भी नहीं बिगाड़ पा रही है? क्या उन्हें यह नहीं लगता की यदि ऐसा ही चलता रहा तो एक खूबसूरत देश तबाह हो जायेगा? पाकिस्तान का जन्म चाहे जिस सपने के साथ हुआ हो, यह तो किसी ने भी नहीं सोचा होगा की वह देश बर्बाद हो जायेगा.
मुझे दर लगता है कि पाकिस्तान जल्दी ही उन लोगों के हाथों में चला जायेगा या उन लोगों से ही उलझा हुआ नजर आयेगा जिन्हें उसने आज तक बढ़ावा दिया है.
आपको क्या लगता है कि पाकिस्तान तालीबनिस्तान बन जायेगा या पाकिस्तान एक खूबसूरत अमन पसंद और खुशहाल देश बन कर उभरेगा? आखिर वहां की आवाम ने किसी का क्या बिगाडा है, उसकी खुशी का ख्याल करने वाला कोई नहीं?

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