हे आगंतुक गण! तनिक सुनो!

चाँद के गिर्द तारों के समान,
समंदरी रेत पर पाँव के निशान,
शादी के कार्डों पर छपे हुए नाम,
बधाईयों वाले कार्डों के पैगाम,
मौके बेमौके भेजे हुए टेलीग्राम
जैसी ही होती हैं इन चिट्ठों पर
हमारी और आपकी टिप्पणियाँ.

इसीलिये, जब आये हो यहाँ तो
इन कहावतों को चरितार्थ करो,
अपने आगमन को यथार्थ करो.
मुझे व मुझ जैसे लेखकों को
अपने कीबोर्ड से कृतार्थ करो.