एक लड़की पर तेज़ाब डाला गया.
दूसरी जींस पहन कर घूम रही थी.
तीसरी ने अपनी माँ की हत्या कर दी.
चौथी को ससुराल में जला दिया गया.
पाँचवीं को सेना मे भरती किया गया है.
छठी ने अपने पति को मार दिया.
सातवीं ने पति के साथ जान दे दी.
आठवीं मेरे साथ ही जी रही है.
नौवीं को लोग मेरी बेटी कहते है.

आप सोच रहें हो कब लिखेगा दस.
मेरा मन कहता है अब करो “बस”.
हमेशा बुलाओ उसे उसके नाम से.
और जब भी देखो चेहरे के उसके,
तो न झांको उसकी टाँगों के बीच.
ताकि बचा सको अपने दिमाग को
ठीक उसी तरह दो फाँक होने से.
क्योंकि ऐसे गिनकर थक जाओगे.