एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
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वो अकेली नहीं है
Mar 5th
जिस अपार्टमेन्ट में मैं रहता हूँ उसका गार्ड आज बदल गया. वास्तव में उसने अपने पेशा बदल लिया. वह अपार्टमेन्ट के गार्ड रूम में अपनी पत्नी और ७ साल की एक बेटी के साथ रहता था. मेरा बेटा भी तकरीबन ५ साल का है कुछ और भी बच्चे हैं जो सभी लगभग ७ साल से कम ही होंगे. सो सब पुरी तरह घुल-मिल गए थे. गार्ड की बेटी का नाम मैं नहीं बताना चाहता सो चलिए उसे कोयल बुलाते हैं. मेरी २ साल की बेटी इन सब में सबसे छोटी है और वह सबको चाहती है. उसके जाने के बाद से मेरी बेटी कई बार दुहरा चुकी है कि कोयल चली गयी. उसका किसी दोस्त बिछड़ने का यह पहला अनुभव है.
इन सब में कोयल मुझे थोड़ी अलग लगती थी, अपने हाव-भाव व बोलने, उठने बैठने के तरीके वगैरह सब में बाकी बच्चों से अलग थी वह. इसके बारे में विस्तार से आगे बता सकूंगा.
मेरे घर में बच्चा चाहे कोई भी हो, एंट्री, खाना-पीना और शोर-शराबा की उन्हें पुरी छूट होती है. जो कुछ भी खाना हो मांग लो, कोई खिलौना चाहिए तो उठा लो वगैरह-वगैरह. अगर मैं या मेरी पत्नी कुछ पका रहे हैं तो पाक रहा व्यंजन जिन बच्चों को पसंद होगा वे किचेन में ही घूमते नजर आएंगे.
इसकी एक वजह यह होती है कि मेरे बच्चे बाकी बच्चों के साथ घुलना मिलना सीखते हैं और साथ ही बाकी बच्चों को खेलने के लिए कहीं और नहीं जाना पड़ता. यही सब सोच कर मैंने घर में फर्निचर भी नहीं लगवाया है.
अब कोयल की समस्या यह है कि उसकी माँ को किसी का खाना देना वगैरह अच्छा नहीं लगता. वह एक स्वाभिमानी औरत थी. पर मुझे जो एक चीज खटकती थी और जिस से मैं चिढ़ने भी लगा था (भगवन मुझे माफ़ करें) कि कोयल कभी भी कुछ मांगती नहीं थी, वह खाने पीने की चीजें बाकी बच्चों की प्लेटों से उठा लेती थी (वह भी कुछ ठगने जैसा). उसको मिठाइयां बहुत पसंद थीं. वह खेलने भी खाने पीने के समय आती थी.
मुझे उसका मेरे यहाँ खाना कभी बुरा नहीं लगा, पर तकलीफ इस बात की होती थी कि एक सात साल की बच्ची जिसका माता-पिता दोनों काम करते हैं, और यदि मेरी पत्नी की गणना सही है तो लगभग बंगलोर जैसे शहर में बिना किराया या बिजली बिल दिए हुए दोनों मिल कर साथ आठ हजार कम लेते थे, थोरे से अंगूर या कुछ समोसे या कुछ मिठाइयों के लिए तरसती रहती थी. यह भी बतला दूं कि उन दोनों के यह एक ही बच्ची थी और उनके कोई और बच्चा नहीं हो सकता (यह डॉक्टरों ने तस्दीक़ कर दिया है).
मुझे यह कभी भी समझ में नहीं आया कि उस नन्ही सी जान के छोटे छोटे अरमान उसके माँ बाप क्यों नहीं पूरा करते? क्या वह बेटी है इसलिए? या उसे बिगाड़ना नहीं चाहते इसलिए? या वे पैसे बचाया करते थे? नहीं, मुझे समझ में नहीं आता कि वे क्या करते थे ना ही मुझे इस बात को समझना इतना जरूरी लगता है.
मेरी तकलीफ यह है कि कोयल यदि कुछ और बरस हमारे यहाँ आती जाती रहती तो क्या उसे नहीं याद आता उसका खाने के पीछे इस तरह का व्यवहार? यदि उसे याद आता तो वह कैसा महसूस करती? जहाँ तक मुझे समझ में आता है यह उसका आत्म-सम्मान छीन लेता. और कहीं न कहीं मैं उसके इस दुःख का कारण होता. कोई भी व्यक्ति अपने अन्दर के इन छोटे छोटे बोझ के तले इतना न दब जाये कि वह सर ही न उठा सके.
भगवन उसे एक सुखद और सम्मानित जीवन प्रदान करें. आप भी कोयल और उसे जैसे बच्चों के भले के लिए प्रार्थना करें.
आप भी मुस्कुरा देंगे
Feb 20th

अखबार पढ़ती हुई कांक्षा

और उसकी ट्राईसाइकिल चलते हुए कांक्षा के पितामह

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