एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग
Posts tagged कवितायेँ
मेरा भारत महान?
Apr 16th
मेरा बाप मर गया
उस के नाम पर दे दो भाई
उसकी माँ भी मर गयी साहब
उस के नाम पर तो दे दो भाई
मेरे बाप का नाना बड़ा सयाना
उसके नाम पर तो दे दो भाई
अल्लाह के नाम पर दे दो भाई
राम के नाम पर दे दो भाई
ईशा के नाम पर ही दे दे भाई
वाहे गुरु दा खालसा, वाहे गुरु दी फतह
अब तो तुम दे दो भाई.
भिखारी लोग घबरा गए,
इधर उधर भागने लगे,
चिल्लाने लगे, चारो तरफ चिल्ल-पों .
फिर एक आवाज आयी
ये तो हमारे नारे थे
तुम अपनी वाली लगाओ ना.
पब्लिक खड़ी सोचती रही
ये अपने नाम पर कब मांगेंगे.
पुलिस भी खड़ी सोचती रही
इनके आगे-पीछे हम क्यूँ भागेंगे.
जनता परेशान और हलकान
वोट दे कर छुड़ाई जान.
नेपथ्य से आवाज आयी
कब तक दिलासा दोगे खुद को
कह के “मेरा भारत महान” ?
मुझे चाहिए एक तख्खलुस
Apr 16th
मुझे चाहिए एक तख्खलुस
इसलिए की लोग जान जाते हैं मेरा नाम
और जब किसी प्रिया का सौंदर्य वर्णन करता हूँ
सोचती है जानकार युवतियां ”कहीं ये मैं तो नहीं”.
मुझे चाहिए एक तख्खलुस
क्योंकि मिलने लगी हैं कुछ युवतियां मेरी पत्नी से,
सुबह, शाम, दोपहर छत के मुंडेर पर.
मुझे डर है कहीं वो लेती न हो मेरा नाम.
मुझे चाहिए एक तख्खलुस
कि लिखे जो ख़त कभी वो युवतियां,
नहीं पहुँच पाए वे मेरी पत्नी के हाथ.
न मालूम हो किसी को तख्खलुस वाले का नाम.
मुझे चाहिए एक तख्खलुस.
कि न सुनूं जब गालियाँ दें कोई सरेआम.
देगा वो गालियाँ मेरे तख्खलुस को, देने दो.
मुझे कहाँ आदत सुनने का कोई और नाम.
मुझे चाहिए एक तख्खलुस
कि कोई नेता जब कभी भड़क जाए.
लाख चाह कर भी मेरी भनक ना पाए,
क्योंकि उसे कहाँ पता होगा मेरा नाम.
मुझे चाहिए एक तख्खलुस.
लिखने के कारण कहीं बदनाम जो हो जाऊं
तो लोग बाग़ न पुकारें मुझे मेरे नाम से.
और जा सकूं बाहर, सुकून से अपने काम से.
मुझे चाहिए एक तख्खलुस
हाँ बस उन्ही बुरे दिनों के लिए.
यही कौतुक है. वर्ना क्या कम है
मेरा नाम जिन्दगी भर के लिए.
एक बेचारा बादल
Apr 15th
घुम्म्क्कड़, आवारा, एक बादल बेचारा,
संयोग था, दुर्योग था, यह तो पता नहीं.
एक अल्हड़ पहाड़ी से एक दिन टकरा गया,
नादान था, उलझ गया, रहने लगा वो वहीं.
नदियों से, तालाबों से, झरनों व समुद्र से,
लाता है चुन चुन कर खुशबू भरे जल.
नहलाता है खुद से अपनी उस प्यारी को,
रहे रूप उसकी प्रिया का, ऐसे ही अविचल.
हर रोज, शाम से ही, रात बहुत देर तक,
सजाता है वो उसे, बारिश के बूंदों से.
फिर आधी रात में, निहारता थोड़ी दूर से,
छिटकती चांदनी को, अल्हड़ के देह से.
भोर से पहले, वह ओस की बूंदों से,
सजाता है फिर से, उस अल्हड़ पहाड़ी को.
और थोडा हो परे, निहारता है हर सुबह,
उस चिकने, चमकते, स्वर्णिम बदन को.
जी चाहे पहाड़ का, पर यह भी एक प्रेम है.
तभी तो इस अल्हड़ पहाड़ी को भी एक डर है.
सोचती है, क्या भरोसा, यह भी तो बादल है.
मुआ न जाने कब फिर कहीं चला जाता है.
बादल भी समझाता है फिर बड़े प्यार से,
समझा कर मेरे पगली!
मैं जाऊँगा तो फिर चला आऊँगा.
कभी इस रूप में या कभी किसी रूप में.
पर तुम क्यों घबराती हो?
जब तक हो तुम, रहेगा तुम्हारा रूप,
और रहेंगे तुम्हरे चाहने वाले बादल.
चढेगी तेरी जवानी, कभी न ढलने के लिए.
न डरता हूँ तनिक मगर, जरा मेरी सोच,
बादल का जीवन है और पानी की मौत.
जीवन यह मेरा, श्रृंगार तो है ही तेरा,
मरते हुए भी तुझे ही सजा जाऊँगा.
प्रेम तेरे देह पर, कुछ ऐसे लिख जाऊँगा.
होगा बदन तेरा, हरा-भरा श्रृंगार से.
आएंगे अनगिनत बादल,
हर मौसम में सँवारने तुझे प्यार से.
निकला न करो घर से अपने ऐ दोस्त
Apr 12th
मालूम है तुम्हे गोरैया नहीं देती अंडे पुराने घोंसलों में.
पर इंसान एक ही घर, एक ही जगह जिन्दगी देता है गुजार
सोच कर कि एक दिन सुनहरे हो जायेंगे इन घोंसलों के तिनके.
पर यह कुछ नया तो नहीं है.
एक हवा चली है शहर में आजकल
जो खींच कर तुम्हारे होश
फेंक देगी तुम्हे किसी बावली भीड़ में
और तू भी चला जायेगा नारे लगाते हुए.
फिर खेलेंगे वो तुम्हारे दिल से
किसी नरपिशाच की तरह.
तुम्हे याद न रहेगा कुछ और इस जहाँ में,
कभी कभी माँ याद आ जायेगी जब पाओगे खुद को नग्न.
इंसान बहुत ही विकासशील जीव है
और तुम उसका एक नमूना.
तभी तो कोई और बताता है कि तुम्हे कैसे जीना है.
इस से अच्छा विकास और क्या होगा.
और इस विकास के लिए तो वोट डाल
तू बता कि तू किसकी मर्जी से जीना चाहता है
बता उन्हें कि वे पसंद हैं तुम्हे सिरमौर की तरह
और तुम्हे मंजूर है उनका तुम्हारे ख्वाबों का रौंदना.
या फिर कह दो कि नहीं चाहिए तुम्हे किसी का विचार.
दे दो मुझे मेरे हिस्से की जमीन और मेरा आसमान
जहाँ हम दो रोटियां उपजा कर सो जायेंगे आस्मां ओढ़ कर.
बच्चों की किलकारियों के साथ नींद बहुत अच्छी आती है.
रात कुछ ऐसे चली गयी जैसे परायी हो
सूरज ऐसे चढ़ रहा ऊपर जैसे महंगाई हो.
निकला न करो घर से अपने ऐ दोस्त
न जाने कहाँ किस मोड़ पर दिल की रुसवाई हो.
जूता गान
Apr 10th
जूता जूता, जूता जूता
भज प्यारे मन जूता जूता
पहनो जूता, फेंको जूता
भज प्यारे मन जूता जूता
खाओ जूता, पाओ जूता
भज प्यारे मन जूता जूता
फेंक दिया किसी ने जूता
भज प्यारे मन जूता जूता
बचा गया फिर कोई जूता
भज प्यारे मन जूता जूता
काला जूता, सफ़ेद जूता
भज प्यारे मन जूता जूता
पीला जूता, नीला जूता
भज प्यारे मन जूता जूता
हरा जूता और लाल जूता
भज प्यारे मन जूता जूता
पूरा जूता, आधा जूता
भज प्यारे मन जूता जूता
सस्ता जूता, मंहगा जूता
भज प्यारे मन जूता जूता
भारी जूता, हल्का जूता
भज प्यारे मन जूता जूता
ताऊ का जूता, भैया का जूता
भज प्यारे मन जूता जूता
भाई का जूता, बहन का जूता
भज प्यारे मन जूता जूता
नेता और अभिनेता को जूता
भज प्यारे मन जूता जूता
टीवी पर जूता, पेपर में जूता
भज प्यारे मन जूता जूता
भाषण में जूता, राशन में जूता
भज प्यारे मन जूता जूता
और नहीं कुछ सूझ रहा तो
भज प्यारे मन जूता जूता
कविता जूता, कथा भी जूता
भज प्यारे मन जूता जूता
ब्लॉगर और पत्रकार जन
तुम भी बजो अब जूता जूता
मैंने कहा अब न छोडो जूता
भज प्यारे मन जूता जूता
-x-
अमाँ अब बस भी करो यार
थोरा जूते से ऊपर आओ
मोजे की बार करो
पैंट की बात करो
स्कर्ट की बात करो
चढ्ढी की बात करो
अंगिया की बात करो
बनियान की बात करो
शर्ट की बात करो
टाई की बात करो
और नहीं हो कुछ
तो क्या जरूरी है बात करो?

आपने कहा