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Posts tagged राजनीति
नेता, भ्रष्ट, घमंडी, मतलबी, चोर, निर्लज्ज वगैरह वगैरह
Apr 6th
जिसको दिल में आया ब्लॉग लिखा, जिसके मुंह में आया किसी नुक्कर पर खड़े हो गए और हजारों गालियाँ नेताओं को दे दी. नेता, भ्रष्ट, घमंडी, मतलबी, चोर, निर्लज्ज वगैरह वगैरह.
मैं यह सोच कर गलती नहीं कर रहा कि हमें और नेताओं की जरूरत है. और नेता का मतलब तो यह भी नहीं होता होगा कि सब के सब सीधे दिल्ली पहुँच जाएँ. तो मैं यह मान कर चलता हूँ कि जरूरत है. हमें ऐसे नेता चाहियें जो हमारी समस्याओं को समझते हों और जिन तक हमारी बात सीधे-सीधे पहुँच सके. तो मैं उन नेताओं को निचले स्तर पर गलियों, मुहल्लों, गाँवों के स्तर पर नेता बनाना चाहूँगा.
मुझे मालूम है कि मैं कोई नई बात नहीं कर रहा. पर पुरानी बात को क्या हो गया है? हमने जो कडियाँ जोड़ रक्खीं थी उसे क्यों तोड़ दिया? हमें बिलकुल जमीनी तौर पर काम करने वाली पार्टियों के नेता सबसे निचले स्तर पर चाहियें जो निज स्वार्थ के लिए, या सिर्फ अपने घर और कार के ऊपर हरा, नीला, लाल, गेरुआ झंडा न लगते हों. जिन्हें यह भी नहीं लगता हो कि वे मोहल्ले के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बनते जा रहे हैं. जो इस बात का ख्याल रख सके कि किस चीज की जरूरत है. ऊपर कही हुई सारी बातें मैं ने होती हुए देखा है.
पर ऐसे नेता हम लायेंगे के कहाँ से? जिसको भी गली का नेता बनाने का मौका मिला वही शेर हो जायेगा. मेरा ख्याल है चुनाव समाज के सबसे छोटे छोटे निवासीय टुकड़े से शुरू होनी चाहिए.
मेरा विचार है कि ऐसे चुनाव हर गली-मोहल्ले में हों, जिसमे उस स्थान का प्रतिनिधि सालाना चुना जाये, और वह अपने से ऊपर के स्तर के नेता, अधिकारी वगैरह से सीधा मिले. यह अधिकार उनको स्वयं मिलने लगेगा जब नेताओं और अधिकारीयों को यह पता चलेगा कि इस व्यक्ति की बात पर जनता उनसे मुंह फेर सकती है.
अब इनमे भी भ्रष्टाचार जैसे अवगुण की संभावनाएं हैं. उसका निदान यह है कि इन नेताओं के ऊपर के नेता और अधिकारीगण भी लोगों के सीधे पहुँच में हों और इनका सालाना चुनाव होना चाहिए और यह कार्य मोहल्लेवासियों द्वारा स्वयं किया जा सकता है. साथ ही लोगों को भी यह भी अधिकार हो कि साल के बीच में ही जरूरत समझने पर बहुमत से उसे बदल सकें.
मतलब अभी आप अपने नेता को जानते हो और उसके ऊपर के नेता को भी. जैसे कि गली का नेता फिर वर्ड कमिश्नर स्तर का नेता या मुखिया. इस से यह होगा कि संवाद में हेर फेर के मौके कम हो जायेंगे. आपने कोई शिकायत या सुझाव दिया पर वह आपके नेता ने ऊपर के नेता तक नहीं पहुंचाई. ऐसी हालत में जब आपका संवाद उसके ऊपर के नेता से होगा तो आपको पता चल जायेगा कि आपका नेता ठीक काम नहीं कर रहा.
और ऐसी व्यवस्था हर स्तर पर होनी चाहिए. आपकी गली के नेता का भी वार्ड कमिश्नर और मुखिया के ऊपर के नेता तक पहुँच होनी चाहिए. तभी पारदर्शिता और जिम्मेदारी का भाव आयेगा और सबको इस बात का दर रहेगा कि उसकी कामचोरी या कोताही उसका नुक्सान तो अवश्य करेगी.
जब हमारा देश ऐसे नेताओं से भरा होगा तभी हमारी बात ऊपर तक पहुंचेगी. यदि किसी पेड़ के पत्ते चमकदार और सुन्दर हैं तो इसका मतलब है उसकी जड़ जमीन के बहुत नीचे से पूरे तंत्र को ऊर्जा प्रसारित कर रही है. फिर देखेंगे कि इनमे से कुछ ऐसे नेता होंगे जो उभर कर ऊपर आएंगे और जमीन से जुड़े अनुभव के साथ देश चलाने का काम कर सकेंगे.
फिर आप न कह सकोगे नेता, भ्रष्ट, घमंडी, मतलबी, चोर, निर्लज्ज वगैरह वगैरह.
कृपया अपने विचार व्यक्त करें ताकि जरूरी संशोधन भी किया जा सके.
राजनीतिक पार्टियों में युवाओं के अवसर
Mar 8th
अभी अभी एक पोस्ट प्रकाशित यह दावा करते हुए प्रकाशित हुआ है कि भाजपा युवाओं का ख्याल रखने वाली पार्टी है.
मैं स्वयं भाजपा का वोटर और समर्थक हूँ, पर इसे नहीं मानता मैं. नेतृत्व के नाम पर मैं कहीं ज्यादा आधुनिक विचार वाला युवा और सामायिक रूप से युवा वर्ग पर प्रभावी व्यक्तित्व देखना चाहूँगा. भारत के प्रधानमंत्री पद के उमीदवार कब्र में पाँव लटकाए बैठे हैं.
अनुशासन के नाम पर महिमामंडन या अपनी मनोकामनाएं पूरी करना कभी भी राष्ट्रहित या जनहित में नहीं हो सकता. यह बहुत ही पीडादायक है कि जिस देश की अधिकतम आबादी युवा हो वहां कोई भी युवा उच्चतम पद के लिए प्रस्तुत नहीं किया जाता. चाहे वह कोई भी पार्टी हो. इसका एक मूल कारण यह भी है कि अधिकतम पार्टियों के पुरानी पीढी के नेताओं का लक्ष्य सिद्ध नहीं हुआ है तो वह दूसरों को अवसर देने का त्याग कैसे करें.
ऐसा नहीं है कि योग्य और सक्षम नेतृत्व की कमी हो बल्कि पार्टियों में अनुशाशन के नाम पर अहम् तुष्टि की जो प्रथाएं चल रही हैं वह वरिष्ठों को किसी कनिष्ठ व्यक्ति को उच्चतम पद के लिए चुनने के इजाजत नहीं देता. जबकि अच्छा यह होगा कि सभी मिल कर पार्टी और देश हित में सोचते हुए सबसे योग्य, प्रभावी और कर्मठ व्यक्ति को इन पदों के लिए चुने. अभीतक किसी भी पार्टी में यह संभव नहीं हुआ है और निकट भविष्य में संभव होता भी नहीं दिखता.
कुछ पार्टियों ने राज्य स्तर पर कुछ युवाओं को मुख्यमंत्री जैसे पद पर स्थापित किया है तो उसके दो ही कारण हैं, पहला कि वह वरिष्ठतम नेता का पुत्र है और दूसरा कि वह स्वयं इतना प्रभावशाली है कि पार्टी को उसके आगे नतमस्तक होना पड़ता है. परन्तु जैसे वर्त्तमान प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी पार्टी के अन्दर से चुनकर आये वैसे कोई युवा अभी तक किसी पार्टी से आते हुए नहीं दिखता.
संदार्भित पोस्ट को पढने के लिए कृपया निम्नलिखित लिंक पर क्लिक करें.
भाजपा है युवाओं का ख्याल रखने वाली पार्टी- भाजयुमो जिलाध्यक्ष

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