परिचर्चा

एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग

मदारी-2

Tags: , , , , , ,

मदारी: जमूरे!
जमूरा: हाँ उस्ताद.
मदारी: खेल दिखायेगा?
जमूरा: सच्चा की झूठा?
मदारी: झूठा तो बहुत देखा पब्लिक ने. अब सच्चा दिखा.
जमूरा: फिर तो फरमाईशी कार्यक्रम होगा. बोल उस्ताद क्या दिखाऊँ?
उस्ताद, इलेक्शन का टाइम है, कुछ उसी पर दिखा.
जमूरा: उस्ताद, इलेक्शन का नाम मत लो (..और रोने लगता है).
मदारी: अब्बे, क्या हो गया? बाप मर गया या माँ भाग गयी?
जमूरा: बाप तो तू ही है और तेरी बीवी भागे तो मेरे ठेंगे से.
मदारी: तो क्या हुआ?
जमूरा: मैं इलेक्शन में खडा होने वाला था पर अब नहीं.
मदारी: बाप से मजाक करता है?
जमूरा: नहीं उस्ताद, सच कह रहा हूँ. मैं इलेक्शन में खडा होने वाला था.
मदारी: चल मान लेता हूँ, फिर क्या हुआ?
जमूरा: मैंने पब्लिक को बोला मैं हिन्दू हूँ, पब्लिक की बहन ने अन्दर कर दिया.
मदारी: ये तो बुरा हुआ. चल जाने दे. खेल दिखा.
जमूरा: अब तो मैं जेल में हूँ. (कह कर भाग खड़ा होता है).

मदारी

Tags: , ,

मदारी: जमूरे!
जमूरा: हाँ उस्ताद.
मदारी: तुमने सुना?
जमूरा: क्या उस्ताद?
मदारी: चुनाव होने वाला है.
जमूरा: हाँ उस्ताद, मैं भी खड़ा हूँ.
मदारी: मजाक मत कर.
जमूरा: वो तो पब्लिक से करूंगा.
मदारी: क्या सोच कर खड़ा हुआ?
जमूरा: प्रधानमंत्री बनना है.
मदारी: औकात में रह.
जमूरा: उस्ताद, एक बात बोलूँ?
मदारी: बोल.
जमूरा: एक प्रधानमंत्री जमूरा बन गया तो एक जमूरा प्रधानमंत्री क्यों न बने?
मदारी: खेल ख़त्म हुआ पैसे मांग.
जमूरा: नहीं मिलता है उस्ताद अभी रिसेस्सन है
मदारी: स्विस बैंक से मांग
जमूरा: पच्चीस लाख करोड़ तो अपने हैं, वही न उठा कर दे दें.

© 2009 परिचर्चा. All Rights Reserved.

This blog is powered by Wordpress and Magatheme by Bryan Helmig.