परिचर्चा

एक हिन्दी-मैथिली ब्लॉग

शायद अच्छाई हमेशा दूसरों में अच्छी लगती है

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मुझे चाहिये एक अच्छा सा रोजगार
क्योंकि मैं अच्छा पैसा कमाना चाहता हूँ
चाहिये एक अच्छी गाड़ी और एक अच्छा घर
एक अच्छी सी पत्नी और अच्छे बच्चे भी
और इससे अच्छा क्या होगा मेरे लिये?

यूँ तो मुझे तब भी अच्छा लगता है
जब कोई बाजी लगाता है देश के लिये
या हटाता है गली में पसरी गंदगी को
या फिर लड़ता है कहीं अन्याय के खिलाफ़
पर मैं ऐसा नहीं करना चाह्ता
क्योंकि उससे कुछ हासिल नहीं होता.

शायद ऐसा ही खयाल हर दिल में आता होगा.
पर क्या सोचते हैं वे लोग जो फिर भी
कुर्बान जाते हैं कुछ ऐसी अच्छाई पर
जिससे कुछ भी अच्छा नहीं होता उनके लिये.
मैं तो सब कुछ अच्छा पाना चाहता हूँ.

जो दूसरों का ख़याल करता हो
और जिसे परवाह हो
इस दुनिया और दुनिया के लोगों की
देखता हूँ उसे लोग अच्छा तो कहते हैं
पर कुछ भी अच्छा नहीं होता उसके साथ.

कल सुना एक सिपाही मर गया
कुछ घुसपैठियों को रोकने में
पर उसके घर का पहरेदार कौन होगा अब.
उसके पीछे तो एक जवान बीवी
और एक मासूम बच्ची भी है.
शायद अच्छाई हमेशा दूसरों में अच्छी लगती है.

नहीं तो ऐसा न होता कि उन घुसपैठियों को
देश के अंदर के लोग चुन चुन कर
कत्ल कर देते यह सोच कर कि
उन्होंने मारा है हमारे जवान को और
न जाने कितनों को निशाने पर रखा है.

चोरों, पॉकेटमारों और लफंगों को पीटने में
बहुतों ने हाथ आजमाया तो होगा.
पर क्या यह अच्छा नहीं होता कि
हर आदमी आजमाता इन घुसपैठियों पर.
शायद अच्छाई हमेशा दूर से ही अच्छी लगती है.

अच्छा तालीबान -बुरा तालीबान

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सुना है पाकिस्तान सरकार ने तालिबानियों का वर्गीकरण किया है, अच्छा तालीबान और बुरा तालीबान. टाईम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा है मस्ट बी जोकिंग. नहीं वह मजाक नहीं कर रहे, उनका अच्छे तालीबान का मतलब उन तालिबानियों से है जो सरकार के इशारे पर चलते हैं और बुरे तालिबानियों का अर्थ कि वह अब उन्हें काबू नहीं कर पा रहे हैं.

स्तिथि जितनी गंभीर दिखती है, वास्तव में उस से कई गुना ज्यादा गंभीर और भयावह है. आप इस बात का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि जब छानबीन ठीक से शुरू भी नहीं हुई थी कुछ पाकिस्तानी नेताओं और अधिकारीयों ने हथियारों के भारत में निर्मित होने की बात कह दी.

मैं इस बात से ज्यादा चिंतित नहीं हूँ कि वे भारत से बदले का मौका ढूंढ रहे थे या अंदरूनी कमजोरियों को ढकने की कोशिश. भयावह यह है कि किस तरह ये नेतागण और अधिकारीगण स्तिथि से मुँह मोड़ कर लोगों का ध्यान बटा कर इस बात से इनकार कर रहे हैं कि वास्तव में पाकिस्तान में कोई समस्या है भी.

और जब तक ये स्तिथि को इमानदारी से जायजा ले कर स्वीकार नहीं करते, सुधार की तो सोच भी नहीं सकते. मतलब इन्होने यह मान लिया है कि चाहे देश भांड में जाये इन्हें कुछ नहीं होगा.

कितना गलत सोच रहे हैं? एक बार अपने सारे कमरे बंद कर के एकांत में निष्पक्ष हो कर फिर से सोचें तो पता चल जायेगा कि क्या हो रहा है.

शायद आप लोगों ने  भस्मासुर का किस्सा न सुना हो.  अगर सुना होता तो पता होता कि असल तालीबान वही है जिसे आप  बुरा तालीबान करार रहे हैं. वास्तव में ऐसी जितने भी गुट हैं जो कलयुगी राक्षस का काम कर रहे हैं वे शक्ति और समृध्धि पाने के लिए कलयुगी देवताओं की तपस्या करते हैं. जिनमे आज एक नहीं कई शिव हैं जो इन भस्मासुरों को अमरता का वरदान देने पर तुले हुए हैं. समस्या तब बढ़ जाती है जब ये भस्मासुर निवासी हों.

आप कलयुगी देवताओं को इस बात का तनिक भी अहसास नहीं है कि यदि ये भस्मासुर इसी तरह बढ़ते रहें और किसी दिन अपनी औकात पर आ जाएँ तो आपको किन कंदराओं में शरण लेनी पर सकती है.

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